Radio Drama “Chaukhat Ke Bahar”

मित्रों प्रस्तुत है आल इंडिया रेडियो के हवामहल कार्यक्रम से साभार लिया गया रेडियो ड्रामा “चौखट के बाहर”| इसमें कामकाजी महिलाओं की घर के अन्दर और बाहर की परेशानियों को रेखांकित करने के साथ साथ स्त्री-पुरुष ग़ैर बराबरी से जुड़े पहलुओं को छुआ गया है| उम्मीद है, ये आपको पसंद आएगा|

Dharm Aur Rajneeti by Dr. Ram Puniyani, Part-2

श्रोताओं, सहकार रेडियो पर प्रस्तुत है धर्म और राजनीति विषय पर डॉ. राम पुनियानी जी के वक्तव्य की दूसरी और अंतिम कड़ी| इस वक्तव्य का वीडिओ हमने यूट्यूब चैनल “छात्र संसद” से साभार लिया है|
हमें पूरी उम्मीद है, ये वक्तव्य आपको पसंद आएगा| हम आपसे अनुरोध करना चाहेंगे कि इसे अपने मित्रों-सम्बन्धियों को साझा करना मत भूलिएगा और यदि आप चाहते हैं कि हम बिना किसी बाहरी दबाव के ऐसी ही जन पक्षधर सामग्रियां आप तक पहुचाते रहें, तो हमें अपना बहुमूल्य आर्थिक सहयोग भी करें|

Dharm Aur Rajneeti : Dr. Ram Puniyani, Part-1

श्रोताओं नमस्कार,
धर्म और राजनीति अपने आप में दो अलग-अलग चीज़े हैं| लेकिन जब राजनीति धर्म की आड़ लेकर आम जनता को आपस में बाँटना और लड़ाना शुरू करती है, तो फिर सपूर्ण मानवता का अस्तित्व खतरे में पड़ जाता है| बहाना होता है कभी गौवंश की रक्षा का, कभी लव-जेहाद का, या फिर कभी मंदिर मस्जिद का|
तो क्या एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते हमें इस समस्या की जड़ों तक पहुँचकर इसका समूल नाश करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए? आइये सबसे पहले हम यह जानने की कोशिश करें कि वास्तव में राजनीतिक पार्टियों को क्यों धर्म का सहारा लेना पड़ता है? ऐतिहासिक तथ्यों/सन्दर्भों के साथ राम पुनियानी जी ने इस सम्बन्ध में अपनी बात रखी है| ये विडियो हमने साभार लिया है यूट्यूब चैनल “छात्र संसद” से| उम्मीद है ये कार्यक्रम आपको पसंद आएगा| इस पूरे वक्तव्य को हमने दो भागों में बांटा है, प्रस्तुत है इसकी पहली कड़ी|
यदि आपको यह कार्यक्रम पसंद आया हो, और आप चाहते हैं कि हम आपके लिए लगातार ऐसे ही कार्यक्रम बनाते रहें, तो हमारे डोनेशन पेज पर जाकर हमें आर्थिक सहयोग भी करें|

Mere jeevan me meri maa – Hemlata Verma

मित्रों,
कहानियों संस्मरणों की श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए हम एक बार फिर लेकर आए हैं एक संस्मरण, जो janjwar.com के “मेरे जीवन में मेरी माँ” से साभार लिया गया है| यह संस्मरण है लखनऊ की हेमलता वर्मा का| उन्होंने अपनी माँ से जुडी यादों को साझा करते हुए स्त्री अस्मिता और समाज में स्त्री-पुरुष गैर बराबरी के कई पहलुओं को छुआ है| तस्वीर सांकेतिक है और ipsnews.com से साभार ली गयी है| सहकार रेडियो के लिए इसे रिकॉर्ड किया है शिल्पी ने|

यदि आपको हमारा यह कार्यक्रम अच्छा लगा हो, और आप चाहते हैं कि हम यूं ही ऐसे कार्यक्रम लगातार बनाते रहें, तो यथासंभव आर्थिक सहयोग (DONATE) करें|

सुप्रीम कोर्ट के चार जजों की प्रेस कॉन्‍फ्रेंस

मित्रों, उच्चतम न्यायालय के चार वरिष्ट जजों की प्रेस कांफेरेंस का मामला आज पूरी मीडिया में छाया हुआ है| देश के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जजों ने प्रेस कांफ्रेंस करके मुख्य न्यायाधीश के कामकाज के तरीके पर सवाल उठाया है| देश के लोकतंत्र के इस ऐतिहासिक घटनाक्रम की जानकारी आम जनता तक पहुँचाने की ज़िम्मेदारी महसूस करते हुए हम इस खबर के कई पहलुओं से आपको अवगत करवा रहे हैं|
हम विभिन्न समाचार-वेबसाइटस पर प्रकाशित ख़बरों के हवाले से इस खबर की मुख्य मुख्य बातें आपको बताएँगे| कृपया इसे डाउनलोड बटन पर क्लिक करके डाउनलोड करें और व्हात्सप्प-ब्लूटूथ-शेयरइट आदि के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों तक पहुचाएं| हमारे बारे में अधिक जानने के लिए यहाँ क्लिक करें|

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Courier Vala Ladka-Sahkar Radio

मित्रो,

टीवी सीरियल्स, फिल्मों और मनोरंजन के तमाम साधनों से आम आदमी के किस्से, उसका सुख-दुःख जैसे गायब होते जा रहे हैं| टीवी सीरियल्स में न तो अपना खून पसीना एक करता मेहनतकश वर्ग नज़र आता है, और न ही अन्न उगाकर पूरे संसार का पेट भरने वाले किसान के सुख-दुःख की बातें होती हैं| आज हम आपके बीच ऐसी ही एक कहानी लेकर आए हैं, जो एक ऐसे युवा की कहानी है, जिसके श्रम का शोषण तो होता ही है, साथ ही कहानी ये भी बताती है कि धनी या आर्थिक रूप से संपन्न तबके के अधिकांश लोग मेहनत मजदूरी करने वालों को किस नज़र से देखते हैं| कहानी का शीर्षक है “कोरियर वाले लड़के की डायरी” इस कहानी को लिखा है भूपेन्द्र सिंह ने और इसे हमने जनज्वार डॉट काम से साभार लिया है| आवाज़ है पवन सत्यार्थी की|
कहानी आपको कैसी लगी ? हमें ज़रूर बताइयेगा, और अगर कहानी आपको पसंद आयी हो, तो अपने मित्रों को शेयर करना मत भूलिएगा| अगर आप ऐसी सामग्री ऑडियो फॉर्म में सीधे पाना चाहते हैं, तो सहकर रेडियो के व्हात्सप्प नंबर 9617226783 पर संपर्क करें| और हाँ, एक बहुत ज़रूरी बात, अगर आपको सहकर रेडियो के कार्यक्रम अच्छे लगते हैं, और आप चाहते हैं, कि हम यूं ही आपके लिए स्वस्थ मनोरंजन और अन्य सामग्रियां लाते रहें, तो हमें आर्थिक सहयोग करें| क्यूंकि सहकार रेडियो अपनी आर्थिक ज़रूरतों के लिए पूरी तरह अपने श्रोताओं पर निर्भर है| यदि आपको हमारा यह कार्यक्रम अच्छा लगा हो, और आप चाहते हैं कि हम यूं ही ऐसे कार्यक्रम लगातार बनाते रहें, तो यथासंभव आर्थिक सहयोग (DONATE) करें|

https://soundcloud.com/user-178511492/kourier-vala-ladka

Ek Thi Gaura – Amarkant

मित्रों, प्रस्तुत है अमरकांत की कहानी “एक थी गौरा”| सहकार रेडियो के लिए इसे पवन सत्यार्थी ने अपनी आवाज़ में रिकॉर्ड किया है| कहानी को हमने हिंदी समय की वेबसाइट से साभार लिया है| आशा है ये कहानी आपको पसंद आएगी|
ये कहानी आपको कैसी लगी ? कमेन्ट में हमें ज़रूर बताइएगा और अगर कहानी आपको अच्छी लगी हो तो अपने मित्रों और सगे-संबंधियों को ज़रूर सुनवाइएगा और इसे लाइक शेयर करके हमारी मुहिम का हिस्सा ज़रूर बनिए| आप अगर व्हात्सप्प पर सहकार रेडियो की सामग्रियां पाना चाहते हैं, तो 9617226783 पर अपने व्हात्सप्प एकाउंट से संपर्क करें|

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Bam ka Darshan By Bhagat Singh

23 दिसम्बर, 1929 को क्रान्तिकारियों ने अँगरेज़ वायसराय की गाड़ी को उड़ाने का प्रयास किया था, जो असफल रहा। गाँधीजी ने इस घटना पर एक लेख ‘बम की पूजा’ लिखा, जिसमें उन्होंने वायसराय को देश का शुभचिन्तक और नवयुवकों को आज़ादी के रास्ते में रोड़ा अटकाने वाले कहा। इसी के जवाब में हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन की ओर से भगवतीचरण वोहरा ने ‘बम का दर्शन’ लेख लिखा, जिसका शीर्षक ‘हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन का घोषणापत्र’ रखा गया। भगतसिह ने जेल में इसे अन्तिम रूप दिया। 26 जनवरी, 1930 को इसे देशभर में बाँटा गया। इस लेख में भगत सिंह ने लगभग उन समस्त बातों का जवाब दिया था, जो कि गांधी जी ने अपने लेख बम कि पूजा में कही थीं| अतः आप सभी श्रोताओं से अनुरोध है कि आप इसे सुनने से पहले सहकार रेडियो में प्रसारित गांधी जी के लेख को भी सुने, ताकि आप गांधी जी और भगत सिंह के बीच के वैचारिक मतभदों और उनके लक्ष्यों व उद्देश्यों को आसानी से समझ सकें|
इस लेख को नौजवान भारत सभा की वेबसाइट से साभार लिया गया है| इसे पवन सत्यार्थी ने अपनी आवाज़ में रिकॉर्ड किया है|

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Bam Ki Pooja By MK Gandhi

मित्रों,

यह लेख गाँधीजी ने 23 दिसम्बर, 1929 को क्रान्तिकारियों द्वारा अँगरेज़ वायसराय की गाड़ी को उड़ाने के असफल प्रयास के बाद लिखा था। इस लेख में उन्होंने क्रांतिकारियों के रास्ते का विरोध किया और लोगों से ऐसी नृशंस कार्रवाहियों का पूरी ताकत से विरोध करने की अपील की थी| साथ ही उन्होंने इस लेख में अहिंसा के रास्ते की उपयोगिता पर प्रकाश डाला था| इस लेख को हमने नया जमाना ब्लॉग से साभार लिया है| भाषा को समझने लायक बनाने के लिए इसके कुछ हिस्सों को संपादित किया गया है| आप यदि ऐसे कार्यक्रम अपने whatsapp अकाउंट पर सीधे पाना चाहते हैं तो हमारे व्हात्सप्प अकाउंट 9617226783 पर अपना नाम और जिला लिखकर भेजें|

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