Bam ka Darshan By Bhagat Singh

23 दिसम्बर, 1929 को क्रान्तिकारियों ने अँगरेज़ वायसराय की गाड़ी को उड़ाने का प्रयास किया था, जो असफल रहा। गाँधीजी ने इस घटना पर एक लेख ‘बम की पूजा’ लिखा, जिसमें उन्होंने वायसराय को देश का शुभचिन्तक और नवयुवकों को आज़ादी के रास्ते में रोड़ा अटकाने वाले कहा। इसी के जवाब में हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन की ओर से भगवतीचरण वोहरा ने ‘बम का दर्शन’ लेख लिखा, जिसका शीर्षक ‘हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन का घोषणापत्र’ रखा गया। भगतसिह ने जेल में इसे अन्तिम रूप दिया। 26 जनवरी, 1930 को इसे देशभर में बाँटा गया। इस लेख में भगत सिंह ने लगभग उन समस्त बातों का जवाब दिया था, जो कि गांधी जी ने अपने लेख बम कि पूजा में कही थीं| अतः आप सभी श्रोताओं से अनुरोध है कि आप इसे सुनने से पहले सहकार रेडियो में प्रसारित गांधी जी के लेख को भी सुने, ताकि आप गांधी जी और भगत सिंह के बीच के वैचारिक मतभदों और उनके लक्ष्यों व उद्देश्यों को आसानी से समझ सकें|
इस लेख को नौजवान भारत सभा की वेबसाइट से साभार लिया गया है| इसे पवन सत्यार्थी ने अपनी आवाज़ में रिकॉर्ड किया है|

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